ढाबा चलानेवाला12वीं पास लड़का, बन गया रिजॉर्ट का मालिक | 12th pass boy running Dhaba, became the owner of the resort

By | January 29, 2022

एक छोटा सा ढाबा चलानेवाला 12वीं पास लड़का, बन गया रिजॉर्ट का मालिक | 12th pass boy running Dhaba, became the owner of the resort

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12th pass boy running dhaba Treeoise Resort (Source : treeoise.com)

Treeoise Resort (Source : treeoise.com)

अंकुश कक्कड़ , एक 12वीं पास लड़का , जिसने अपने छोटे से ढाबे का व्यापार से  शुरू किया आज वह 33000 स्क्वायर यार्ड में फैले रिजॉर्ट( Treeoise Resort ) के मालिक हैं।

क्या आप सोच सकते है कि , किसी ने एक छोटे से ढाबे से शानदार रिजॉर्ट (Resort) बनाया हो , जी हाँ , ऐसा ही हुआ है , जहाँ हमारे देश में लाखों उद्यमी अपना स्टार्टअप और उद्योग चलना या स्टार्ट करना चाहते है , लेकिन सब सपने सच नहीं होते ,आज हम बात करने जा रहे है एक ऐसे शख्स कि जिसका बचपन से ही सपना था ,अपना है शानदार रिजॉर्ट (Resort) खोलने का, रहे हैं। इन्होने अपनी शुरुआत लुधियाना में एक छोटे से ढाबे से की। और आज उसका सपना सच हो गया है , और आज वो हिमाचल प्रदेश में एक शानदार रिजॉर्ट Treeoise Resort का मालिक है जी हाँ , यह कहानी अंकुश कक्कड़ के संघर्ष की कहानी है। जिन्होंने ढाबे से रिजॉर्ट ( Treeoise Resort ) तक पहुंचने का सफर कैसे तय किया

अंकुश ने अपने बचपन से ही बहुत संघर्ष देखा था। उनके पिता जी की एक छोटी सी शॉल की दुकान थी , उन्होंने बचपन से ही अपने पिता के काम में साथ देना शुरू कर दिया था, वह पढ़ाई के साथ-साथ, पिता के काम में हाथ भी बंटाता था। जब तक स्कूल की पढ़ाई चली तो उन्होंने साथ साथ अपने पिता के बिज़नेस में पूरा योगदान दिया , लेकिन १२थ के बाद उन्हें लगा की उन्हें कुछ करने चाहिए, अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना है।

अब स्कूल की पढ़ाई    ख़त्म होने के बाद उन्होंने , ग्रेजुएशन नहीं की और , अंकुश ने बिजनेस स्किल्स की ट्रेनिंग लेने का फैसला किया। बिजनेस स्किल्स की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद के बाद, साल 2000 में अंकुश ने अपने पिता के साथ मिलकर, लुधियाना बस स्टैंड के पास एक ढाबा खोला। मेहनत और लगन रंग लाई ,और उनका ढाबा जल्द ही बहुत लोकप्रिय हो गया , मेहनत करते रहे और काम बढ़ता गया , जब कुछ समय के बाद उनकी आर्थिक स्थिति कुछ मजबूत हुई, तो उन्होंने लुधियाना में ही एक 42 बिस्तरों वाला होटल और खरीद लिया।

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अब समय आया रिजॉर्ट खोलने का सपना पूरा करने का

अंकुश जी का कहना है कि,” मेहनत करने वाले और उम्मीद रखने वालों को सफलता मिलती ही है” जब उन्होंने पूरी लगन और मेहनत से मन में ठान लिया , कि अपना सपना पूरा करना ही है , 20 साल कि मेहनत रंग लायी , और बस क्या था, पूरा 20 साल बाद 2020 में हिमाचल प्रदेश के बद्दी नमक जगह पर अपना 33000 स्क्वायर यार्ड जगह लेकर अपना सपना साकार किया और अंकुश जी ने अपना पहला रिजॉर्ट खोल दिया , इस रिजॉर्ट का नाम क्या रखा – Treeoise Resort

अंकुश ने लुधियाना में अपने ढाबे और होटल के बिजनेस से पूरा २० साल में जो कुछ भी कमाया था , अपना सब कुछ इसी रिसोर्ट में लगा दिया और इसमें उनका लगभग 3 करोड़ रुपए का खर्च हुआ।

लॉकडाउन के दौरान की कोरोना मरीजों की मदद

Treeoise Resort (Source : treeoise.com)

Treeoise Resort (Source : treeoise.com)

Treeoise Resort of Ankush KAKKAR (अंकुश कक्कर ) , आज तो उनके Treeoise Resort कि अपनी वेबसाइट भी है जिसकी वेबसाइट का नाम :- treeoise.com है । Treeoise Resort (Source : treeoise.com)

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कोरोना महामारी का होटल इंडस्ट्रीज पर प्रभाव

अब जब अंकुश जी ने किसी तरह अपनी सारी पूंजी लगा कर साल 2020 में अपना रिजॉर्ट ओपन किया , तो उसी समय कोरोना महामारी आ गई , और साल 2020 में तो कोरोना अपने पूरा चरम पर था , और भारत में सब जगह लॉकडाउन लग गया था। और उसी समय उसी समय 28 फरवरी 2020 को अंकुश ने Treeoise Resort की शुरुआत की थी। और अप्रैल में ही सम्पूर्ण लॉकडाउन लग गया था ,अब कोविड-19 की वजह से व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना तो था ही और हुआ भी ठीक ऐसा ही। होटल इंडस्ट्रीज कोविड-19 के बाद घाटे में चली गईं। लेकिन अंकुश जी ने हिम्मत नहीं हारी ,उन्हें लगा कि ये समय भी टल जाएगा , एक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी के कारण तकरीबन 43 प्रतिशत होटल बंद रहे, क्योंकि देश में लगे लॉकडाउन के दौरान सब जगह आवाजाही पर पाबंदी लगाई गई थी।

Treeoise Resort USED AS QUARANTINE ZONE ( Treeoise Resort को क्वारेंटाइन जोन के तौर पर उपयोग किया )

लॉकडाउन के दो तीन महीने बाद सरकार के आदेशानुसार , Treeoise Resort को क्वारेंटाइन जोन ( QUARANTINE ZONE ) के तौर पर उपयोग किया जाने लगा था ,उनके रिजॉर्ट का टाई- अप वही के एक मल्होत्रा हॉस्पिटल के साथ कर दिया गया था ,और दोनों ने मिलकर कोरोना मरीजों के इलाज में सहायता की। लेकिन ऐसे में भी जब , अपनी सारी पूंजी लगा देने के बाद , नए रिजॉर्ट में कोई कमाई शुरू होने से पहले , उन्होंने अपने रिजॉर्ट में काम कर रहे कुल 35 कर्मचारियों की तनख्वाह से लेकर उनके रहने और खाने की पूरी व्यवस्था की थी, जबकि उस समय रिजॉर्ट से होने वाली आय जीरो थी।

लेकिन समय बदला , हालात कुछ सामान्य हुए , होटल्स को कुछ शर्तो के खुलने कीअनुमति मिली पर मार्च 2021 तक Treeoise Resort का टर्न ओवर 1.2 करोड़ रुपए तक पहुंच गया और रिजॉर्ट ने 13.4 लाख रुपए का मुनाफा भी कमाया।

शॉल फैक्ट्री खोलेंगे अंकुश ( FUTURE PLAN )

अंकुश जी का मानना है कि , जो उनका पुराना बिज़नेस था,और उन्होंने जहाँ से शुरआत की थी , और उसी बिज़नेस को बड़ा करने की उनकी चाहत थी, वो आज वो बिज़नेस नहीं छोड़ सकते , अब वो उसे एक बड़े लार्ज स्केल पर करना चाहते है। क्योकि उनके पिता जी की शाल की दुकान थी , तो अब वह अपनी एक शॉल फैक्ट्री खोलेंगे। अंकुश अपने पिता के छोटे से शाल की दुकान के बिजनेस को अब बड़ा बनाने की चाहत रखते हैं।उनके पिताजी की आज भी लुधियाना में शॉल की एक छोटी सी दुकान हैं। लेकिन अब उनका सपना अपने पिताजी को बड़ी शाल फैक्ट्री के मालिक के रूप में देखना है।

अंकुश कक्कड़ जी की ये संघर्ष पूर्ण जीवन गाथा , हम सब के लिए , एक सीख है , “यदि हम मेहनत करते रहेंगे, तो एक दिन अपने लक्ष्य को जरूर प्राप्त कर लेंगे , और हमारे सपने जरूर सच होंगे”

अभाव है तो या हुआ ? ज़ज़्बा उनको धता बता देता है ।

जीत होती है उनकी, जिनमे हो कुछ कर गुजरने की चाह। और अपनी पहचान बनाने की ललक हो। कदम दर कदम आगे
बढ़ते जाते है और बन जाते है एक ऐसी हस्ती , जिसकी कहानी गर्व से सुनती सुनाती है दुनिया…

अभावो में जीते हुए, एक मुकाम हासिल कर
लेना , उन बाधाओ पर जीत है जो हर दिन एक नया संकट बन कर सामने आती है ।

 

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