Miracle : 4-brothers-paan-shop-300-crore-dairy-empire | पान की एक छोटी सी दुकान, बना 300 करोड़ का डेयरी साम्राज्य

By | January 30, 2022

पान की एक छोटी सी दुकान, बना 300 करोड़ का डेयरी साम्राज्य, जो कभी 4 भाइयो ने मिल कर शुरू की थी | 4-brothers-paan-shop-300-crore-dairy-empire

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4 BROTHERS PAAN AND COLD DRINK SHOP AMRELI

4 BROTHERS PAAN AND COLD DRINK SHOP

कभी 4 भाईयो ने मिल कर अमरेली शहर में पान और कोल्ड ड्रिंक्स की एक छोटी सी दुकान शुरु की। आज उनके पास 500 से ज्यादा फूड प्रोडक्ट्स हैं और वे विदेशी बाजारों तक इसे पहुँचाना चाहते है।

4 brothers started a small paan shop turned into 300 crore dairy empire

ये कहानी है , गांव में रहनेवाला सीधे-सादे भुवा परिवार की, जो गांव में खेती करके अपना गुज़ारा करता था, बच्चो के लिए गांव में अच्छी पढ़ाई की सुविधा नहीं थी ,तो इस घर के मुखिया दाकू भाई ने पास के शहर अमरेली जा कर बसने का फैसला किया जिससे उनके चार बेटे दिनेश, जगदीश, भूपत और संजीव अच्छी पढ़ाई पा सके तथा , कोई अच्छी नौकरी पाकर , अपना और अपने परिवार का बढ़िया जीवन यापन कर सके।

इस तरह से बस बच्चो की बेहतर जिंदगी के लिए साल 1987 में भुवा परिवार अमरेली आ गय। अब यहाँ आने के बाद उन्होंने परिवार का पेट पालने के लिए कोई काम तो शुरू करना ही था, बहुत ज्यादा पूंजी तो थी नहीं , तो उन्होंने बड़े भाई दिनेश के सुझाव पर सिटी बस स्टैंड पर एक पान की दुकान खोल ली

बस स्टैंड होने की वजह से , वह लोगो का काफी आना जाना था ,तो पान और कोल्ड ड्रिंक की एक छोटी सी दुकान के सफल होने की पूरी सम्भावना थी। चार भाई थे ,लेकिन आधे दिन बड़े भाई दिनेश दुकान संभालते थे और बाकी सब भाई मिल जल कर करते थे। धीरे-धीरे दुकान से अच्छी-खासी आमदनी होने लगी और सभी भाइयों की पढ़ाई भी सही ढंग से चलने लगी। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था, लेकिन तभी नगर निगम ने उनकी दुकान तोड़ दी।

नगर निगम ने दुकान तोड़ दी

साल 1989 में गुजरात के अमरेली शहर नगर निगम ने शहर के विकास व् सड़को के चौड़ी-करन के चलते सड़क किनारे अवैध छोटी-छोटी दुकानें और स्टॉल्स को हटाने का काम शुरू किया , अब नगर निगम ने उनकी दुकान भी तोड़ दी , लेकिन इसके साथ ही तोड़ दिए ,भुवा परिवार के सपने और पेट पालने का ज़रिया। अब उनका सब कुछ छिन चुका था, लेकिन इस परिवार ने हिम्मत नहीं हारी , उन्होंने फिर से उठ खड़े होने की सोची , हिम्मत जुटाई
परिवार ने फिर से हिम्मत जुटा कर नै दुकान खोली

पूंजी तो ज्यादा थी नहीं , उन्होंने फिर से बस स्टैंड के पास एक छोटी सी 5X5 फ़ीट एक दुकान अपनी खरीद ली और उन चारों भाइयों ने फिर से नई तरह से शुरुआत करने का फैसला लिया। हिम्मत नही हारी , काम का तो पता था ही। सामान वही पान और कोल्ड ड्रिंक था, बस दुकान नई थी।

जन्माष्टमी का मेला आया और किस्मत ने पलटी मारी

भाइयो ने पूरी लगन से काम किया ,और दुबारा से काम सेट कर लिया, उनकी दुकान बस स्टैंड पर थी , लोगो की काफी आवा-जाही थी , साल 1993 में जन्माष्टमी उत्सव के दौरान बस स्टैंड पर काफी भीड़ भाड़ रहती थी ,तो उन्होंने सोचा की क्यों ना दुकान पर आइसक्रीम रखे , क्योकि कई लोग पूछते थे, इस उत्सव में मेले जैसी भीड़ भाड़ रहती थी ,बड़ी संख्या में तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों की आने से बिज़नेस भी अच्छा चल रहा था ,तो उन्होंने अपनी दुकान पर आइसक्रीम बेचने का निर्णय लिया , और यहॉ वो निर्णय था जिसने उनकी जिंदगी बदल दी, और आइसक्रीम के बिज़नेस (Sheetal ice cream) की नींव रखी

स्थानीय कंपनी से आइसक्रीम लाने लगे

उन्होंने एक लोकल कंपनी से आइसक्रीम का टाई-उप किया, और कमीशन पर आइस क्रीम बेचने लगे , उनका आइस क्रीम का बिज़नेस अच्छा चल निकला , अच्छा प्रॉफिट होने लगा, तो उन्होंने सोचा की क्यों ना हम अपनी खुद की आइस क्रीम बना कर बेचे , तो उन्होंने इस प्लान के तहत आइस क्रीम बनाना भी सीख लिया , और अपनी खुद की आइसक्रीम फैक्ट्री लगाने का निर्णय किया। साल 1996 के बाद से वे अपनी बनाई हुई आइसक्रीम बेचने लगे।

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चुनौतियां बढ़ती जा रही थी

उनकी आइस क्रीम की डिमांड बढ़ती जा रही थी , तो उन्होंने 1998 में उन्होंने Sheetal ice cream नाम की अपनी कंपनी शुरू कर दी ,
और बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए , और फिर हमने ‘गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (GIDC)’ में एक फैक्ट्री लगा दी ,और शुरू में उन्होंने यहां 150 लीटर दूध के प्रॉसेसिंग की क्षमता वाला प्लांट लगाया गया था।

पहले वो लोगो से आइस क्रीम लाते थे, अब पुरे शहर में और कई जगह पर भी उनके ब्रांड की आइस-क्रीम बेचीं जा रही थी , लेकिन नई-नई चुनोतिया जन्म लेती जा रही थी , उनमे से एक थी बिजली के समस्या , क्यों आइसक्रीम के काम में बिजली तो लगातार चाहिए, ज्यादा लम्बा पावर कट हो तो सारी आइस- क्रीम ख़राब हो जायेगी , लेकिन अमरेली में बार-बार गुल होने वाली बिजली की समस्या सबसे बड़ी थी। इससे बिक्री बहुत प्रभावित हो रही थी।

यहाँ तक की उस समय अमरेली में ,कभी-कभी तो 24 घंटे बिजली नहीं रहती थी। और भी सभी गांवों का यही हाल था। बिजली का न आना एक बड़ी चुनौती और चिंता का विषय थी। लेकिन जब तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2003 में पूरे गुजरात में बिजली पहुंचाने के लिए ग्राम ज्योति योजना लॉन्च की, तब बिजली में सुधार होना शुरू हुआ , और उन्होंने उन ग्रामीण और शहरी इलाकों में अपनी आइसक्रीम पहुंचानी शुरू की, जहां पहले से 100 प्रतिशत बिजली आ चुकी थी

कंपनी ने कई नए डेयरी प्रोडक्ट्स लॉन्च किए

साल 2012 में उनकी कंपनी ने कई नए डेयरी प्रोडक्ट्स लॉन्च किए और कंपनी इस आइस क्रीम के अलावा भी बहुत कुछ बनाने लगी ,तो अब उन्होंने कंपनी का नाम बदलकर, ‘शीतल कूल प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ रख दिया तब तक उनकी यह कंपनी दूध और दूध से बने अन्य उत्पाद, जैसे- दही, छाछ, लस्सी भी बेचना शुरू कर चुकी थी। अब उन्होंने साल 2015 में फ्रोजन फूड, पिज़्ज़ा ,परांठा, स्नेक्स आदि भी बनाना स्टार्ट किया , लेकिन वो ज्यादा सफल नहीं हुआ ,

नए नए एक्सपेरिमेंट चलते रहे

अब कुछ साल बाद 2016 मे उनकी कंपनी स्पेशल नमकीन की नई वैराइटी लेकर बाजार में उतरी और फिर अगले साल 2017 में,शीतल कूल प्रोडक्ट्स कंपनी, शीतल कूल प्रोडक्ट्स लिमिटेड कंपनी बन गई।

सबसे बड़ी रोजगार कंपनी बन चुकी है Sheetal ice cream

आज Sheetal ice क्रीम कंपनी रोजाना 2 लाख लीटर दूध की प्रॉसेसिंग कर रही है , और इस कंपनी में 1500 कर्मचारी काम करते हैं, बड़ी संख्या में महिलाएं काम कर रही है , 800 महिलाये इस कंपनी में काम कर रही है , और आज इस कंपनी के 500 से ज्यादा उत्पाद है। भूपत का दावा है कि शीतल कूल प्रोडेक्ट क्षेत्र में सबसे बड़ी रोजगारदाता कंपनी है।

Sheetal ice cream ने क्वालिटी से कभी समझौता नहीं किया।

उनकी COMPANY में सभी उत्पाद खासकर आइसक्रीम और लस्सी, शुद्ध दूध और क्रीम से बनाए जाते रहे है हैं। यही उनका मार्केटिंग का एजेंडा था , उन्होंने गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया। आज फ्रोजन लस्सी हमारा सबसे ज्यादा बिकने वाला प्रोडक्ट है।

उन्होंने गुजरात के दूर-दराज के इलाकों और कई गांवों और सेमी अर्बन इलाकों में अपने प्रोडक्ट लेकर गए , कई गांवों में तो लोगो ने आज तक आइस क्रीम का स्वाद ही पहली बार चखा था। वो ऐसी सुदूर जगह तक पहुंचे , जहा और कई कभी नहीं पहुंचा था। ब्राण्ड और गुणवत्ता वाले उत्पादों से बनी साख, आज उनकी कंपनी को इस मुकाम पर लेकर आई है।

कई मुश्किलों का मिलकर सामना किया भाईयों ने

शुरुआत में उनके पास कोई टीम नहीं थी। अकेले ही सब कुछ संभाल रहे थे। सारे काम खुद ही करते थे , खुडी ही अपने उत्पादों को बेहतर बनाने और ग्राहकों से जुड़ने का काम करते। नयी दुकानों पर जाने का एक मकसद यह भी था अपने प्रोडेक्ट के बारे में उनको बता सके।
उन्होंने सबने दिन के 15-18 घंटे काम किया।

कही आने जाने की लिए उनके पास खुद का कोई वाहन नहीं था। और ऊपर से कभी कच्चे माल की समस्या , कभी बिजली की समस्या ,उनका ज्यादातर कच्चा माल 200 किलोमीटर दूर पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से आता था, जिससे उन्हें अतिरिक्त परिवहन लागत खर्च भी आता था।

4 brothers paan shop 300 crore dairy empire

सब भाइयों ने बिज़नेस की तमाम जिम्मेदारियों को आपस में मिल बांट कर निभाया। आज इस बिज़नेस (Sheetal ice cream) से परिवार को बेहतर जीवन जीने और बाकी के कई लोगों को रोजगार देने में मदद मिली है।किसी को नहीं पता था कि यह बिज़नेस कहां तक जाएगा, लेकिन कुछ सालों में ही , ये नयी से नयी ऊंचाइया छूता गया , सबक ये है की अगर आप पूरी ईमानदारी और मेहनत से काम करते हैं, तो आपको नई ऊंचाइयों को छूने से कोई नहीं रोक सकता है, और सबसे बड़ी बात भाइयो में प्यार , प्रेम और एकता।

 

अब उनके बच्चे भी इसी काम से जुड़ रहे है

परिवार के बच्चे भी इसी काम से जुड़ रहे है , भाई भूपत के बड़े बेटे यश भुवा इस समय कंपनी के कार्यकारी प्रमुख के रूप कंपनी सम्भाल रहे है , और आज पूरे भारत में उनके 30,000 आउटलेट्स हैं और 50 बिज़नेस पार्टनर्स है। यश भुवा इस कंपनी को और आगे बढ़ाना चाहते हैं। और अपनी विरासत को बनाए रखना और विदेशों तक में इसका विस्तार करना चाहते है।

कंपनी में कई उतार-चढ़ावों को देखा और सीखा कि कंपनी चलाना किसी एक व्यक्ति का खेल नहीं था , कंपनी को इस मुकाम तक लाने में चारों भाइयों ने समान रूप से कड़ी मेहनत की है। भाईचारे, एक समान नजरिए और भाइयो में प्यार , प्रेम और एकता से परिवार को सफल होने में मदद मिली है।

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