Success : 2 रुपये से शुरुआत कैसे बनीं करोड़ों की मालकिन ,कल्पना सरोज | Story of Kalpana Saroj ( Original Slumdog Millionaire )

By | December 1, 2022

सफलनामा ! 2 रुपये से शुरुआत कैसे बनीं करोड़ों की मालकिन ,Story of Kalpana Saroj ( Original Slumdog Millionaire )

सफलनामा! घरेलू हिंसा का सामना करने से लेकर पद्म श्री तक, कहानी कल्पना सरोज की | Story of Kalpana Saroj, Original Slumdog Millionaire

महाराष्ट्र की रहनेवाली कल्पना सरोज ने 16 साल की उम्र तक हर तरह की तकलीफें झेलीं, लेकिन हार न मानकर आगे बढ़ते हुए, उन्होंने कमाल ही कर दिखाया। | kalpana saroj

महाराष्ट्र की रहनेवाली कल्पना सरोज ने 16 साल की उम्र तक हर तरह की तकलीफें झेलीं, लेकिन हार न मानकर आगे बढ़ते हुए, उन्होंने कमाल ही कर दिखाया। | kalpana saroj

 

आज की कहानी ‘Original Slumdog Millionaire’ के नाम से जानी जाने वाली कल्पना सरोज की है, जिन्होंने 16 साल की उम्र तक गरीबी, आक्रामक व्यवहार, गुंडागर्दी जैसी कई यातनाओं का सामना किया और 2 रुपये की मजदूरी से शुरुआत की और आज वो 2000 करोड़ की के साम्राज्य की मालकिन बन गईं है ।

कल्पना जी का जन्म 1961 में महाराष्ट्र के अकोला जिले के एक छोटे से शहर रोपरखेड़ा में एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था।

कल्पना को हमेशा से ही पढ़ने और लिखने का बहुत शौक था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि घर का खर्च उठाना ही बहुत ज्यादा चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में उनका किसी बड़े स्कूल में एडमिशन होना अव्यावहारिक था। उन्होंने अपनी शिक्षा शहर के एक सरकारी स्कूल से शुरू की थी, लेकिन स्कूल में दलित होने के कारण बच्चे उन्हें चिढ़ाते थे.

हालांकि, उन्होंने तब भी स्कूल जाना नहीं छोड़ा, लेकिन जब वो केवल 12 साल की थी , घर की स्थिति को देखते हुए , उनकी शादी उनसे उम्र में 10 साल बड़े आदमी से करवा दी गई । शादी के बाद, कल्पना अपने पति के साथ मुंबई में एक झुग्गी बस्ती में चली गई, जहाँ उसे छोटी-छोटी गलतियों के लिए मारा जाता था । कल्पना चारों ओर से पूरी तरह टूट चुकी थी , उसका रो रो कर बुरा हाल था ,

kalpana saroj from domestic violence to padma shri

पापा को देखकर उसके आंसू नहीं रुके ( Original Slumdog Millionaire)

शादी के डेढ़ साल बाद एक दिन जब कल्पना के पिता उनसे मिलने आए तो कल्पना उन्हें गले लगाकर खूब रोईं और उसका रोना देख कर उनके पिता भी अपने आंसुओं को रोक नहीं सके, वो भी रोने लगे ,फिर , वहां कल्पना की स्थिति देखकर और सब कुछ जानकर वह कल्पना को अपने साथ घर वापिस ले आये , यह समय वो था , जब किसी भी समाज में , किसी भी विवाहिता का मायके में रहना आम जनता की नजर में पाप की श्रेणी में आता था। , यह कोई बहुत बड़े पाप से कम नहीं था।

कल्पना सरोज को और उनके परिवार को लोगो के ताने सुन सुने कर , इतनी गलानि होती थी , एक दिन , इस सबसे परेशान होकर , कल्पना ने 16 साल की उम्र में आतम हत्या करने की कोशिश की , हालांकि, उसे समय पर अस्पताल ले जाया सका और उसकी जान बच गई और इस घटना ने सरोज का अपने और समाज के प्रति दृष्टिकोण को पूरी तरह से बदल दिया। और कल्पना ने सोचा कि वह कुछ काम करेगी।

एक पुलिस कांस्टेबल की बेटी होने के नाते, उसने पुलिस बल में शामिल होने का प्रयास किया, लेकिन कम शिक्षा के कारण ऐसा नहीं कर सकी और फिर मुंबई लौट आई और एक होजरी कंपनी में 2 रुपये प्रति दिन के हिसाब से मजदूरी का काम करने लगी।

अपनी बहन को इलाज के अभाव दम तोड़ता देख कल्पना सरोज ने कुछ बड़ा करने की ठानी ( Original Slumdog Millionaire )

2 साल के बाद कल्पना ने अपनी बहन को आर्थिक तंगी के कारण अपनी आंखों के सामने दम तोड़ते देखा और फिर उसने कुछ बड़ा करने का फैसला किया। उन्होंने 50,000 रुपये उधार लेकर एक सिलाई मशीन खरीदी और खुद सिलाई करने लगे। धीरे-धीरे काम चलता रहा और उसने एक बुटीक स्टार्ट कर दी।

22 साल की उम्र में, कल्पना सरोज ने एक फर्नीचर व्यवसाय भी शुरू कर दिया ,और एक स्टील विक्रेता से दूसरी शादी कर ली , जिसके साथ उनकी एक बेटी और एक बेटी हुई , लेकिन उनके पति की 1989 में मृत्यु हो गई। हालांकि, तब तक कल्पना मुंबई में एक बड़ा नाम बन चुकी थी।

कुछ समय बाद देश में एक उल्लेखनीय निर्णय लिया गया और सुप्रीम कोर्ट ने 17 सालों से बंद पड़ी ‘कमानी ट्यूब्स’ को मालिकों के हाथ से लेकर वर्कर्स को कंपनी चलाने के लिए दे दी।और फिर वर्कर मदद के लिए कल्पना के पास आए और साल 2000 में कल्पना ने सारे विवाद, सारे कर्ज़ का निपटारा करवाया और हर मुकदमे में जाने लगीं।

महाराष्ट्र की रहनेवाली कल्पना सरोज ने 16 साल की उम्र तक हर तरह की तकलीफें झेलीं, लेकिन हार न मानकर आगे बढ़ते हुए, उन्होंने कमाल ही कर दिखाया। | kalpana saroj ( Original Slumdog Millionaire)

पद्म श्री और राजीव गांधी रत्न पुरस्कार से सम्मानित ( Original Slumdog Millionaire)

आखिरकार मार्च 21, 2006 को कोर्ट ने कल्पना को कमानी तुबेस की कमान सौप दी । तब उन्हें न तो tubes का कोई ज्ञान था और न ही मनगमनेट की कोई जानकारी थी , फिर भी कल्पना ने वर्कर्स के साथ कड़ी मेहनत और साहस के बल पर १७ सालो से बंद पड़ी उस कंपनी को पूनजीवित किया।

आज कल्पना सरोज, कमानी स्टील्स, कल्पना बिल्डर एंड डेवलपर्स, केएस क्रिएशंस जैसी दर्जनों कंपनियों की मालकिन हैं। पद्म श्री और राजीव गांधी रत्न के अलावा, कल्पना को सामाजिक मदद और व्यावसायिक उद्यम के लिए देश-विदेश में कई सम्मान मिल चुके हैं। आज कल्पना का जीवन देश ही नहीं दुनिया भर की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा की तरह है।

अगर आप महिला है तो आप अपने को कमजोर ना समझे , जो काम आदमी नहीं कर पाते , कई बार वो काम महिलाये आराम से कर लेती है। अगर आपका भी कोई सपना है , तो रुके मत ,हार मत माने , अगर अपने ऊपर विश्वास हो तो कोई क्या नहीं कर सकता।

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