चाय पी के cup खा लो | DRINK TEA IN IT, THEN EAT CUP-Eco friendly mystery behind Attaware edible cutlery

By | January 23, 2022

Attaware Eco Friendly Edible Cutlery India |

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पहले इनमे चाय पियो , फिर इन्हे खा जाओ , आटे और गुड़ से बने हैं ये कप

 

अधिकतर आपने देखा होगा की घर में होने वाले छोटे-मोटे  फंक्शन में या किसी सार्वजानिक फंक्शन में जैसे की किसी भंडारे आदि में अक्सर थर्माकोल या प्लास्टिक से बने बर्तनों प्रयोग में लाये जाते है।  लेकिन ये तो हम सब जानते की अगले दिन उन थर्मोकोल या प्लास्टिक के कप,और प्लेट्स का क्या होता होगा , जी हां , वो तो कूड़े के ढेर में जाते है , लेकिन क्या हम जानते है ,  कि ये प्लास्टिक, हमारे पर्यावरण के लिए कितने ज्यादा  हानिकारक हैं , कई बार हम बोलेंगे की जानते तो है लेकिन क्या करे , की और विकल्प भी तो नहीं है ।  तो अब है इसका विकल्प  आटे और गुड़ से बनने वाले बर्तन (Edible cutlery startup) ,जी हां, ‘आटावेयर’ कटलरी स्टार्टअप (Edible cutlery startup), आटे और गुड़ से कुछ ऐसे बर्तन तैयार कर रहा है, जिन्हें इस्तेमाल करने के बाद खाया भी जा सकता है। इंसानों के साथ-साथ, ये जानवरों के लिए सुरक्षित और इको फ्रेंडली भी हैं।

चाय पी के cup खा लो

Eat In It & Eat It – Eco friendly mystery behind Attaware edible cutlery

 

पहले इसमें खाना खाओ , फिर इसकी को खाओ , हाँ जी ,  थाली में खा सकते हैं और फिर थाली में भी खा सकते हैं। वे अनाज (चावल, गेहूं, जौ, ज्वार, आदि जैसे सभी प्रकार) और गुड़ से बने होते हैं।

Attaware Eco Friendly Edible Cutlery India

Attaware Eco Friendly Edible Cutlery India

 

यमुना नदी में तैरते थर्माकोल ने किया सोचने को मजबूर

 

साल 2019 में पुनीत दिल्ली से वृंदावन की यात्रा कर रहे थे। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने यमुना नदी के तट पर कुछ तैरता हुआ देखा। उन्होंने जब गाडी रोक कर देखा तो पाया कि वे स्ट्रोफोम (थर्मोकोल) यूज एंड थ्रो प्लेट थे जो 7.5 किलोमीटर तक फैले हुए थे। दृश्य ने उसे चिंतित कर दिया।  उस दिन उन्होंने पानी में जो कुछ देखा, उससे उन्हें बहुत दुःख लगा और सारे रास्ते उनके दिमाग में पानी में तैरता इतना सारा  थर्माकोल ही घूमता  रहा।

वृंदावन पहुंचकर एक जगह पुनीत ने देखा की एक जगह , साधुओ  को भोजन कराया जा रहा था , और खाना ,खाने के लिए लोगों की लंबी कतार लगी हुई थी , और वहां पर भी डिस्पोजेबल प्लेट्स में ही खाना दिया जा रहा था , बाद में एक साधु को जब प्लेट नहीं मिली, तो उन्होंने क्या किया , उन्होंने पूड़ी हाथ में ले ली और, खाना परोसने वाले व्यक्ति से पूड़ी पर ही  छोले डालने के लिए कहा। और उन्होंने पूड़ी और छोले दोनों को खा लिया , इस तरह से पूरी ने ही प्लेट का काम किया , और कोई भी कूड़ा नहीं हुआ, ना ही कोई गंदगी हुई , यह बात उनके दिमाग में घूमती रही ,  कि क्या कोई ऐसी प्लेट भी बनाई जा सकती , जो अगर खाना खाने के बाद खा ले , तो गंदगी कि समस्या से परमानेंट मुक्ति मिल जायेगी , सबसे बड़ी बात पर्यावरण को कोई नुक्सान नहीं पहुंचेगा।

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अब इस घटना के बाद पुनीत जी ने  ऐसी प्लेट्स ही बनाने के विचार के ऊपर काम करना शुरू  कर दिया जिसे इस्तेमाल करने के बाद खाया भी जा सकता हो।

पुनीत जी मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले है , लेकिन कैलिफ़ोर्निया बेस्ड  एक कंपनी  Global Recruitment Manager के पद पर थे , लेकिन अब पूर्ण रूप से से अपनी कंपनी के लिए ही डेडिकेटेड  है  जो इस तरह के नए प्रोडक्ट्स बना रही है , और साथ ही पृथ्वी को बचाने और प्लास्टिक कटलरी के उपयोग को कम या ख़त्म  करने  और कचरे से बचने में अपनी भूमिका का निर्वाहन कर रही है,  उन्होंने रिसर्च  के काम पर तकरीबन 6 साल बिताए और फिर 15 अगस्त 2019 को रजिस्टर्ड, आटावेयर बायोडिग्रेडेबल प्राइवेट लिमिटेड (Edible cutlery startup) नमक कंपनी की शुरुआत की।

 

सेहत के लिए भी है अच्छा

 

Attaware founder with all the different Edible Cutlery products

 

पुनीत जी कि कंपनी ने सबसे पहले , चाय का कप बनाना शुरू किया था, जिसमे चाय पीने के बाद उस कप को बिस्कुट कि तरह खा भी सकते है , क्योकि अक्सर हम इंडियंस को चाय के साथ कुछ बिस्किट या रस्क, या फिर मठरी आदि चाहिए ही होता है,तो बिस्किट कि तरह  खाने वाला चाय का कप, हमारी खाने की जरूरत को भी पूरा कर देता है।”

पुनीत जी ने अपनी रिसर्च  के दौरान कई चीज़ों के साथ प्रयोग किया, और  उन्होंने  गुड़ के साथ गेहूं, बाजरा, ज्वार, मक्का और कई दूसरे अनाज को मिलाकर एक अपना पहला एडिबल कप तैयार किया। क्योकि वैसे भी  हम लोग स्नैक्स को सेहत के लिया अच्छा नहीं मानते है , लेकिन इसमें मल्टी -ग्रेन्स  होने के कारन  यह खाने वाला कप, सेहत के लिए भी काफी अच्छा है। इसमें कैल्शियम, प्रोटीन और खनिजों की प्रचुर मात्रा में मौजूद है।

 

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कैसे बनते हैं ये कप ?

 

सबसे पहले गन्ने के रस में अनाज मिलाते हैं और इसे गुड़ बनाने के लिए उच्च तापमान पर उबालते हैं। और फिर गुड़ के टुकड़ों को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल करते हैं और, जब कप बनाना होता है  तो गुड़ के टुकड़े पिघलाते हैं और इडली जैसे सांचे में डाल कर कोई भी अकहार दे सकते है।

कप के साथ-साथ अब उन्होंने  प्लेट, चम्मच , कटोरी आदि सब कुछ बनाना शुरू कर दिया है , ताकि पूरी तरह से कचरे कि  समस्या का समाधान दिया जा सके ।

 

पुनीत जी कि यह पूरी प्रक्रिया वैदिक तकनीक पर आधारित है।

 उन्होंने इस पर पूरा रिसर्च किया है , कि हमारे शरीरी पर इसका कोई दुष्प्रभाव ना हो ,उदाहरण के लिए, पूर्णिमा के दिन, अर्धचंद्र के दिन या अमावस्या के दिन या वैदिक कैलेंडर के ग्यारहवें दिन तापमान अलग होगा।  ये बर्तन खाना डालने से पिघलते नहीं हैं, गीले हो जाते है लेकिन ,  सूक्ष्मजीवों को पकड़ नहीं पाते हैं। इन्हे केवल एक बार ही प्रयोग में लाया जा सकता है ,

 

कितने समय कि शेल्फ लाइफ है।  ?

6 महीने की शेल्फ लाइफ है।

 

क्या सब कुछ खाया जा सकता है ?

हां, चूंकि वे खाने योग्य होते हैं, इसलिए आप खाना खाने के बाद प्लेट, कटोरी या चम्मच खा सकते हैं।

 

कितने समय तक खाना रख सकते है ?

उनके इन बर्तनो में  5-6 से घंटे  तक भोजन को रखा जा सकता है , अब सब कुछ जैसे  प्लेट, चम्मच, कांटे, कटोरे, पुआल, गिलास और ढक्कन के साथ कंटेनर आदि भी उपलब्ध हैं।

 

अगर आप प्लेट , कटोरी नहीं खाना कहते है ,

अगर आप इन्हे खाना नहीं चाहते हैं, तो उन्हें फेंक दें और कोई भी जानवर या कीड़े खा सकते हैं। और यदि नहीं तो इसे बायो-डीग्रेड (पूरी तरह से गल कर ख़तम होने   में ) होने में केवल 2 सप्ताह लगते हैं। जबकि प्लास्टिक या  थर्मोकोल आदि कि  प्लेट्स को वहां पड़े रहने में सैकंडो साल लगते हैं।

 

इस प्रकार, इसके कई फायदे हैं।

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आटावेयर कटलरी की विशेषताएं:-

  1. 100% बायोडिग्रेडेबल डिस्पोजेबल कटलरी

  2. WHO, SSI और स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा Covid-19 महामारी के दौरान उपयोग करने के लिए एक सुरक्षित उत्पाद के रूप में प्रमाणित।

  3. फ्रिज में  सम्मान रखने के लिए उपयुक्त और माइक्रोवेव में भी करने योग्य

  4. 100% कम्पोस्टेबल

  5. 6 महीने का शेल्फ जीवन।

  6. कोई फ्लेवर्स  ,एडेड  कलर्स , प्रेसेर्वटिवेस  नहीं है

  7. इको-फ्री पैकेजिंग किया जाता है।

  8. बच्चों के लिए पूर्ण तय सुरक्षित।

  9. एक बार के प्रयोग के लिए (एकल उपयोग उत्पाद)

  10. गर्म और ठंडे दोनों सर्विंग्स के लिए प्रयोग कर सकते है।

  11. आटावेयर की कीमत 5 रुपये से लेकर 25 रुपये तक है।

 

6 से 12 महीने की शेल्फ लाइफ कैसे आयी ,

 

जब लाक डाउन  लगा तो , तो क्योकि उस दौरान कोई बड़ी सभा या पार्टी नहीं हो रही थी। इस वजह से प्लेट्स , कप आदि  की मांग में भारी कमी आई। उनके बहुत सारे  थोक ऑर्डर्स रद्द हो गए तो उन्होंने केवल  एडिबल कप बनाने का फैसला किया।

लाक डाउन  के इन २ सालो में  उन्होंने बहुत कुछ नया सीखा ,सबसे बड़ी सीख तो यही थी कि इन बर्तनों कि शेल्फ लाइफ  6 से 12 महीने तक कैसे बढ़ाये ,  इन बर्तनों को सिर्फ गेहूं से नहीं, बल्कि दूसरे अनाजों और गुड़ के साथ भी बनाया जा सकता है। इससे उनकी सेल्फ लाइफ 6 से 12 महीने तक बढ़ गई।

Attaware Eco Friendly Edible Cutlery India

Attaware Eco Friendly Edible Cutlery India

उनकी कंपनी हर  हफ्ते करीब 9.5 लाख कप बेचती  है।और वो कुछ नया भी करते रहते है , उनकी कंपनी  आटावेयर (Attaware edible cutlery), ने पिछले साल 2021 में कप के नौ नए फ्लेवर्स लांच किये है , जिसमे अदरक, केरामल, सौंफ, इलायची, सन्तरा, तुलसी, स्ट्रॉबेरी, वनीला और कॉफी हैं।, अब ग्राहक चाय पीने से पहले कौन से कप में चाय चाहिए वो, भी बता सकते है , बड़े दूकानदार ये ऑप्शन ग्राहकों को दे सकते है।

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35 लाख लीटर पानी की बचत और 50 से ज्यादा लोगों को रोजगार

 

पुनीत जी के अनुसार ,एक स्टडी से पता चलता है कि उनकी कंपनी आटावेयर की वजह से लगभग 90 टन प्लास्टिक डिस्पोजेबल को कचरे में जाने से रोकने में मदद मिली है। , साथ ही  इस इको फ्रेंडली स्टार्टअप के जरिए, उन्होंने 35,00,000 लीटर से ज्यादा पानी की बचत की है और महामारी के दौरान 50 से ज्यादा कर्मचारियों के लिए रोजगार भी पैदा किया। अगर ऐसा है , पुनीत जो को तो गर्व  होना ही चाहिए , पर हमें भी उनके इस काम पर गर्व होना चाहिए , और हम चाहेंगे कि और वह और अधिक बेहतर काम करने के लिए प्रेरित हो।

 

पुनीत जी कि कंपनी आटावेयर बायोडिग्रेडेबल प्राइवेट लिमिटेड का फ्यूचर प्लान

Attaware Eco Friendly Edible Cutlery India

Attaware Eco Friendly Edible Cutlery India

 

 

 

वे दिल्ली में स्थित हैं, और कई संगठनों द्वारा भारत में खाद्य कटलरी के रूप में पहचाने जाते हैं और पूरे देश में अपने काम का प्रसार करते हैं। और भारत के 86 शहरों और दुनिया के 89 देशों में बढ़ने की योजना बना रहे हैं।

भारत ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया है और 2022 तक इसे खत्म करने का संकल्प लिया है। यह पुनीत का एक बेहतरीन कदम है, जिन्होंने पहल की है और इतने सारे लाभों के साथ पर्यावरण के अनुकूल कटलरी सेट को उपयोगी बनाया है।

यह सिंगल यूज प्लास्टिक कटलरी से लड़ने के लिए वरदान है। धन्यवाद पुनीत।

तो दोस्तों। पुनीत ने पहल की है लेकिन प्रकृति को बचाना हर जीव का कर्तव्य है। यह वापस लौटने का समय है, प्लास्टिक की नहीं प्रकृति की देखभाल करें। पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों और आदतों का प्रयोग करें।,

आपसे अनुरोध है कि कृपया आटावेयर कटलरी  की कहानी , अपने दोस्तों , मित्रो से शेयर जरूर करे ,क्योकि प्रकृति को बचाना हर जीव का कर्तव्य है। क्योंकि शेयर करने का मतलब  देखभाल करना  है, और यह हम सब कि जिम्मेदारी है ।

तो अगली बार जब भी आप किसी पार्टी की मेजबानी करें, तो पर्यावरण का भी ध्यान रखने के लिए कुछ समय निकालें। इसका अच्छी तरह से उपयोग करें और प्लास्टिक के  और गैर-बायोडिग्रेडेबल डिस्पोजेबल से बचें।

 

यदि आप उससे संपर्क करना चाहते हैं और इन आटावेयर  का उपयोग करना चाहते हैं तो www.attaware.com देखें

 

पुनीत जी से कांटेक्ट करने के लिए , सोशल मीडिया एकाउंट्स :-

फेसबुक: https://www.facebook.com/attawarecutlery/

इंस्टाग्राम: https://www.instagram.com/attawarecutlery/

punjeet dutta कॉल या व्हाट्सएप संपर्क: +91 98710 14728

 

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