जानिए क्या है सरोगेसी जिससे प्रियंका चोपड़ा बनीं मां | Know What is surrogacy through which Priyanka Chopra became a mother

By | January 22, 2022

जानिए क्या है सरोगेसी जिससे प्रियंका चोपड़ा बनीं मां |

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Know What is surrogacy through which Priyanka Chopra became a mother

What is surrogacy through which Priyanka Chopra became a mother.

Priyanka Chopra, Nick Jonas become parents, welcome baby via surrogacy

 

बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा (प्रियंका चोपड़ा) हाल ही में माँ बनने का गौरव प्राप्त किया हैं। वह माँ तो बनी है , लेकिन आपको येबात थोड़ी अजीब लगेगी वह नार्मल तरीका से माँ नहीं बनी है। वह बच्चे कि बायोलॉजिकल मदर तो है , लेकिन प्रसव का सारा काम किसी और ने किया है , जी हां उन्हें सरोगेसी (सरोगेसी) के जरिए मां बनने का सुख मिला है। उन्होंने सेरोगेसी के द्वारा माँ बनने का ऑप्शन को यूज़ किया है , और यह खुशखबरी , प्रियंका चोपड़ा और उनके पति निक जोनस ने आज यानी शनिवार 22 -जनवरी 2022 को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर फैंस के साथ साझा की। वैसे प्रियंका से पहले भी और एक्ट्रेस सरोगसी के द्वारा माँ बन चुकी है जी हां, सरोगेसी के मां बनने की लिस्ट में प्रियंका अकेली नहीं हैं। बता दे कि , प्रियंका से पहले कई बॉलीवुड कपल सरोगेसी से पैरेंट्स बन चुके हैं। और इस लिस्ट में प्रीति जिंटा, शिल्पा शेट्टी, करण जौहर, एकता कपूर, शाहरुख खान, आमिर खान, तुषार कपूर जैसे कई बड़े बॉलीवुड सितारे हैं। तो आइये जानते है। कि ये सरोगसी होती क्या है। कैसे होती है , और इसका कितना खर्च होता है।

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सरोगेसी क्या है | Know What is surrogacy ?

सरोगेसी में एक दंपति और एक महिला के बीच एक समझौता किया जाता है। जो अपना बच्चा चाहते है। अगर इस बात को सीधे शब्दों में कहा जाये तो सरोगेसी में एक दंपति अपना बच्चा पैदा करने के लिए किसी दूसरी लड़की या महिला की कोख किराए पर लेते है ,जो इसके लिए पैसे भी चार्ज करती है , साधारण शब्दों में, एक महिला का ‘ गर्भ किराए पर ‘ लिया जाता है। जब तक कि बच्चा पैदा नहीं हो जाता। और जो महिला सरोगेसी के दौरान मां बनती है, वह अपने डोनर या अपने अंडों के जरिए दूसरे जोड़े के लिए गर्भवती होती है। सरोगेसी का उपयोग केवल तभी के लिए किया जाता है जब किसी जोड़े को जन्म देना मुश्किल हो रहा हो या कोई अन्य कारण हो, जिसकी वजह से वो ऐसा करने के लिए मजबूर हो। हालाँकि, सरोगेसी के माध्यम से पैदा हुए बच्चे के कानूनी माता-पिता वही दंपत्ति होते है , क्योकि बिओलॉजिकली वही उस बच्चे के माता पिता है सेरोगेट मदर का उसमे कोई लेना देना नहीं होता है , इसके लिए पूरा कॉन्ट्रैक्ट किया जाता है ,और सारा का सारे मेडिकल खर्च , और जो कुछ भी खर्च होता है , वो सब कुछ उस दंपत्ति को ही करना होता है , साथ ही सेरोगेट मदर को भी अच्छी खासी रकम देने होती है , जो कई लाखो में हो सकती है ,सेरोगेट मदर को गर्भावस्था के दौरान अपनी और गर्भ में पल रहे बच्चे की देखभाल करने के लिए भी पेमेंट किया जाता है।

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Know What is surrogacy through which Priyanka Chopra became a mother

अगर सेरोगेट मदर ,दंपत्ति से से बच्‍चा पैदा करने के लिए पैसे लेती है, तो इसे कमर्शियल सरोगेसी कहते हैं। हर देश में कमर्शियल सरोगेसी को लेकर अलग-अलग नियम हैं।
लेकिन इंडिया में कमेरिसिअल सेरोगेसी को मान्यता प्राप्त नहीं है साल 2009 इंडिया में कानूनी मदद से सरोगेसी को वैध किया था लेकिन इसके लिए पेमेंट नहीं किया जा सकता है । कमर्शियल सरोगेसी पूरी तरह से बैन रखी गई थी।

सरोगेसी कितने प्रकार की होती है सरोगेसी मुख्यतः दो प्रकार की होती है। ट्रेडिशन सरोगेसी और जेस्‍टेशनल सरोगेसी ,ट्रेडिशन सरोगेसी की प्रक्रिया में आर्टिफिशियल या नैचुरल इनसेमिनेशन होता है, भारत में ट्रेडिशनल सरोगेसी को अब तक लीगल नहीं किया गया है।

जेस्‍टेशनल सरोगेसी को सबसे पहले 1986 में शुरू किया गया था। इस प्रक्रिया में लैब में ही आईवीएफ की मदद से भ्रूण को बनाया जाता है और फिर सरोगेट मदर के गर्भाशय में इंप्‍लांट किया जाता है। भारत में जेस्‍टेशनल सरोगेसी को मान्‍यता प्राप्‍त है। सेरोगेट मदर बच्चे की बायोलॉजिकल मां (जैविक मां) नहीं होती है। और न ही ,सरोगेट मदर का बच्चे से आनुवंशिक रूप से कोई संबंध होता है, यानी गर्भावस्था के दौरान सरोगेट मदर के अंडे का उपयोग नहीं किया जाता है।वह केवल बच्चे को जन्म देती है।

भारत में सेरोगेसी के क्या फायदे है।

निसंतान दंपत्तियों सेरोगेसी का फायदा उठा सकते है।

अगर दंपत्ति में इनफर्टिलिटी कि समस्या है तो ऐसे दंपत्ति सरोगेसी की मदद से पेरेंट्स बन सकते हैं।
जो दंपत्ति माँ बाप नहीं बन सकते है , फिर भी वो अपना बच्चा पैदा कर सकते है
एलजीबीटी कम्‍यूनिटी के कपल्‍स भी सरोगेसी से अपना बच्‍चा पैदा कर सकते हैं।
आईवीएफ भी एक तरह से सरोगेसी में ही आती है
सरोगेसी की मदद से जन्‍म के बाद से ही पेरेंट्स अपने बच्‍चे का पालन कर सकते हैं।
बच्‍चा गोद लेने पर वो बायो लोजिकली किसी और का बच्चा होता है , उसमे आपकी आदते या गुण नहीं होते है

 

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