Impressive :10-ways-to-avoiding-argument | किसी बहस  से बचने के 10 तरीके

By | April 10, 2022

10 WAYS TO AVOID GETTING INTO AN ARGUMENT | किसी बहस  से बचने के 10 तरीके

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हर किसी ने यह अनुभव किया होगा कि , कभी न कभी उसे व्यर्थ की बहस में उलझना ही पड़ता है , कोई न कोई बात ऐसी हो ही जाती है , की हमें कभी कभी इस कड़वे अनुभव का सामना न चाहते हुए भी करना पड़ता है ।

बाद में हमें बुरा लगता है , कभी किसी ने हमें ऐसा कुछ कह दिया होता है , जो हम चाह कर भी भूल नहीं पाते , और कभी ऐसा भी होता है , हम ज्यादा बोल देते है , चाहे बाद में हमें महसूस भी हो, पर बोले हुए शब्दों को वापिस नहीं लिया जा सकता है ,

कहते है , कमान से निकला तीर और, जबान से निकली बात वापिस नहीं आती, वो हमारी नहीं रहती वो किसी और की हो जाती है ,

शब्दों का आदान-प्रदान अक्सर उस क्षण की गर्मी में किया जाता है जिसे वापस नहीं लिया जा सकता है हालाँकि कुछ लोग इस बात पर भी ‘बहस’ करेंगे कि थोड़ी सी बहस स्वस्थ और अच्छी है। और कभी-कभी ‘हवा को साफ’ करने की आवश्यकता होती है,

लेकिन मेरा मानना है बहुत से और भी तरीके है तनाव को हल करने के , बहस करने की बजाय

और सबसे अच्छा तो यही है की, व्यर्थ के वाद विवाद से बचा जाए , और बहस में पड़ा ही ना जाए।
बाद में तो सिर्फ बात रह जाती है , जो आपने कही या सुनी। और कभी वापिस नहीं हो सकती , चाहे आप कितना भी पछ्ता लो या सामने वाला पछता ले

तो बे मतलब की बहस और अनावश्यक संघर्ष से बचने के लिए मैंने अपने अनुभाव से 10 ट्रिक्स सोची है। आप भी देखे क्या ये आप पर काम करती है या नहीं ,

1. बात को मन में मत दबा कर रखो।

अगर आप किसी बात से परेशान हैं या किसी ने आपको नाराज़ किया है, तो सबसे बुरा काम जो आप कर सकते हैं, वह है उसे अपने मन में लेकर अंदर ही अंदर घुटना ,
और सारा दिन उसी बात को सोचते रहना और परेशान रहना और जब आप अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं होंगे। तब आप अंदर ही अंदर खीजते रहेंगे और हो सकता है गुस्से में भड़कते रहे, या बिना मतलब की बातो पर गुस्सा करते रहेंगे

ये सही नहीं है , जब किसी चीज़ ने आपको परेशान किया हो, तो उसे आवाज़ दें, कोई तो आपका ऐसा मित्र या सगा होता ही है , जिसे आप अपने मन की कह कर हलके हो सकते है , कई बार तो पति और पत्नी में इतनी अच्छी अंडरस्टैंडिंग होती है , और आप आपस में अपनी परेशानी दूसरे को बता कर अपने मन का बोझ हल्का कर लेते है।

जो भी हो उसे पाले मत , उसे हल करने का तरीका खोजें और आगे बढ़ें।
और यदि आपने उन्हें स्वस्थ तरीके से हल नहीं निकाला, तो वो स्ट्रेस या टेंशन का कारण बनेगा , यही बाते कई बार टेंशन, डिप्रेशन और हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनते है , और हो सकता है कि आपकी भावनाएं समाप्त हो जाए ,

जो भी हो , वो ख़तम किया जा सकता है , किसी भी बात को अपने मन में पालना अच्छी बात नहीं है। , मेरा एक पर्सनल फार्मूला है , जो मैंने आर्ट ऑफ़ लिविंग के कोर्स में सीखा था ,”LET GO ” ,

देखो , जीवन में कभी अच्छा आता है , कभी बुरा आता है , जो भी आता है , वो बीत जाता है , जिंदगी आगे चलती रहती है , परमानेंट कुछ नहीं होता , ना सुख , ना दुःख , तो जो भी आपके जीवन में आये ,अच्छा या बुरा , हमेशा मन में बोलो , “LET GO ” उसे मन में लेकर सोचते मत रहो , बस टेंशन ख़तम , जब भी मन में टेंशन हो मन में 2 -3 बार बोलो “LET GO ”

आर्ट ऑफ़ लिविंग सुदर्शन क्रिया क्या मैजिक है।

2. अपनी बात कहो , लेकिन चिल्लाओ मत।

जब भी आप बहुत परेशान होते हो , तो कई बार आपको ये समझ में नहीं आता की ” मैं परेशान क्यों हूँ , क्या बात मुझे परेशान कर रही है ”
,बस आप कहते है की मैं परेशान हूँ , ये नहीं पता क्यों , देखो — “अगर आप इस बारे में उचित रूप से बात करने के लिए तैयार नहीं है ,

और आपको नहीं मालूम कि आपको क्या परेशान कर रहा है, तो कहें ‘मैं अभी इस बारे में बात करने के लिए बहुत परेशान महसूस कर रहा हूं – क्या हम इसके बारे में बाद में बात कर सकते हैं ?’।

ऐसा करने से आप अपने आप को शांत और रिलैक्स होने के लिए समय देते हैं, अपने विचार एकत्र करते हैं , और फिर सोच समझ कर अपनी बात और मामले को इस तरह से बताते हैं जिससे दूसरे को आपकी बात समझ में आये और विवाद शुरू होने की संभावना न हो। कभी कभी किसी समस्या को हल करना इतना आसान होता है ,

लेकिन हम चिल्ला कर बात को और ख़राब कर देते है। यदि आप अपनी आवाज उठाने के बजाय शांति से इसके बारे में बात करते हैं, तो वो ज्यादा बेहतर है । वैसे भी चिल्लाने से बात बनेगी तो है नहीं , ज्यादा सम्भावना है की बात और बिगड़ेगी ही , इसलिए चिल्लाना किसी समस्या का हल नहीं है।

चिल्लाने से दूसरे व्यक्ति के रक्षात्मक होने की संभावना है , मतलब वो बात को सँभालने से ज्यादा अपने आप को बचाने के बारे में सोचने लगता है , और ,और उनकी प्रतिक्रिया वापस आप पर चिल्लाने की हो सकती है। , तो ऐसे में जब दोनों चिल्लायेंगे तो किसी भी समस्या के हल निकलने की सम्भावना बिलकुल नहीं होगी।

मतलब आप बोलो अपनी बात रखो , और जब आप बोलने के लिए तैयार हो ,उसी समय आंसर देना जरुरी नहीं होता, बाद में पूरी बात अपने मन में ठन्डे दिमाग से सोच कर , फिर अपनी बात दूसरे को बताओ , और ऐसे बोलो की बहस न हो पाए, तो हल जरूर निकलेगा

3. अतीत को बीच में मत लाओ।

अगर किसी ने पहले कभी आपके साथ गलत किया है , और बात ख़तम हो चुकी है , और आप उसे उसके लिए माफ़ कर चुके है , तो फिर उस बात को दुबारा बीच में लाना सही बात है है , मतलब अगर आपने किसी को उसके अतीत में किए गए किसी काम के लिए माफ कर दिया है, तो अपनी बात पर कायम रहें और उसे अतीत में ही छोड़ दें!

कई बार ये बहुत मुश्किल है कि , आप पुरानी बातो कि याद न करे , और अगर आपको लगता है कि आप घटना से आगे नहीं बढ़ सकते हैं, तब भी आप सोचो , कि जो हो चूका है , वो वापिस नहीं हो सकता है , अब तो आगे जो होना है वो ही आपके हाथ में है ,

तो उस बात को ना छेड़ना ही ज्यादा अच्छा है , अगर आपके साथ किसी ने ऐसा गलत किया है , कि आप बिलकुल भूल ही नहीं सकते तो आपके पास 2 उपाय है , या तो आप व्यक्ति से बिलकुल नाता तोड़ दे, लेकिन ज्यादातर रिश्तो में ऐसा संभव नहीं होता है ,

तो दूसरा उपाय है ही , आप उस बात के लिए उसे माफ़ करे , और ऐसे व्यक्ति से संभल कर बोले ताकि भविष्य में ऐसा कुछ दोबारा ना हो । यह सबसे स्वास्थ्यप्रद काम होता है।

4. कोशिश करें और उनके दृष्टिकोण को समझें।

हमेशा सामने वाला ही गलत नहीं होता है , कभी कभी केवल हम या कभी दोनों ही जिम्मेदार हो सकते है,
ये जरुरी है , कि , आप दूसरे कि बात को भी सुने और समझे , कि वो कहना क्या चाहते है , उनकी क्या अपेक्षाएं है ,

कई बार हम दूसरे को सुने, बिना ही सोच लेते है , कि वो गलत है , या वो कहना कुछ और चाहता है , और आप कुछ और समझने लगते है।

इसलिए ये भी जरुरी है , कि आप उनकी बात और उनके दृष्टिकोण को भी समझे , सिर्फ अपनी ही बात किसी पर थोपना सही है होता

अपने आप को उनके स्थान पर रखें और उनके दृष्टिकोण को समझने की कोशिश करें,कि उनकी क्या मजबूरियां है , या जरूरते है ,
उनकी बात को मानना चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो। उनके नजरिये से , उनकी बात को भी जरूर सोचने का प्रयास करें। तो आप एक समझौता खोजने में सक्षम हो सकते हैं जो आप दोनों के लिए उपयुक्त हो।

5. असहमत होने के लिए सहमत।

यदि आपने 4th पॉइंट पर विचार किया और उनकी बात को भी ध्यान से सुना , लेकिन फिर भी यह नहीं समझ पा रहे हैं , वो चाहता क्या है, या आप से सोचते है , कि बात तो उनकी भी ठीक है , और मेरी बात भी सही है ,

तो,अगर एक ही विषय पर आपकी अलग-अलग राय है? इसके बारे में सोचो। क्या आपकी बात को मनवाना क्या वास्तव में मायने रखता है? क्या यह इतनी बड़ी बात है कि , ये एक-दूसरे की भावनाओं को ठेस पहुँचाने लायक है या आप बात को एक तरफ रख कर आगे बढ़ सकते हैं ?

अगर बात इतनी बड़ी नहीं है , कि उसके लिए एक दूसरे से रिश्ते ख़राब किया जा सके। और बात इतनी बाद भी नहीं है कि उसे अपनी नाक का सवाल बनाया जाए तो ज्यादा अच्छा ये है कि दूसरे कि बात को मान लो और बात को ख़तम करो।
इसे यह होगा , कभी वो भी आपकी बात को मानेगा, वो आपकी दिल से कदर करेगा।

6. बड़ा व्यक्ति बनें

अगर आपको लगता है कि कोई आपके साथ झगड़ा करने की कोशिश कर रहा है, तो उन्हें झगडे करने का मौका बिलकुल न दे , उसे वो बिलकुल न करने दे जो वे चाहते हैं – बड़ा व्यक्ति बनें और इससे ऊपर उठें।

अगर आपको लगता है कि वे आपको उकसाने की कोशिश कर रहे हैं, तो वह से चले जाओ , ज्यादा अपनी अहम् का सवाल मत बनाओ , ये सोचो कि इस समय उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है ,

तो क्या आप ऐसे किसी के साथ उलझना चाहेंगे तो मानसिक रूप से सही ना हो , और फिर आप क्या होंगे ( आप भी तो मानसिक रोगी ही हुए ना )

तो कुछ समय के लिए खुद को उनसे अलग कर ले , और उस परिवेश (वातावरण या जगह ) से अपने आप को हटा दें। टहलें, कोई मूवी या शो देखें, उन्हें शांत होने के लिए समय दें। हो सकता है कि जब आप उनके साथ कुछ घंटों बाद फिर से जुड़ेंगे, तो उनका मूड बदल गया होगा।

यदि नहीं, तो उनसे पूछें कि उन्हें क्या परेशान कर रहा है और ईमानदारी से अपनी मदद की पेशकश करें। ( मतलब उनसे पूछे कि वो क्यों परेशान है , उन्हें क्या दिक्कत है , और क्या आप उनके किसी काम आ सकते है।

7. शांत हो जाओ।

यदि आप जानते हैं कि सामने वाला आपसे तर्क-वितर्क के मूड में हैं, तो अपने आप को स्वस्थ मानसिक स्थिति से परिचित कराएं।
किसी से अचानक ऊँचे स्वर में बात करने से पहले, या किसी ऐसी चीज को आवाज देने से पहले अपने दिमाग में धीरे-धीरे दस तक गिनने की कोशिश करें और गिनें – फिर ये मन हो मन सोचे कि क्या यह इसके लायक है।,

क्या ये इसके लायक है , कि मैं अपना समय इस कि लिए ख़राब करू और इससे व्यर्थ कि बहस करू।
जब आप खुद को नाराज़ और गुस्से में महसूस करें तो गहरी सांस लें और उन चीजों याद करने की कोशिश करें जो आपको जीवन में खुश करती हैं।,

जिन बातो को याद करके आपको ख़ुशी मिलती है , यह आपकी अंदर से उठा सकता है और आपको खुद को और किसी और को परेशान करने से रोक सकता है।

8. इसे व्यक्तिगत रूप से न लें।

जब लोग क्रोधित, निराश या परेशान होते हैं, तो कभी-कभी वे ऐसी बातें कह देते हैं जिनका उन्हें कोई मतलब नहीं होता। कोशिश करें कि खराब मूड को व्यक्तिगत रूप से न लें या जो वे एक पल की गर्मी में कह देते हैं। , उसे दिल पर मत लें।
कभी-कभी जब हम तनाव में होते हैं तो हम अपनी दृष्टि की स्पष्टता खो देते हैं, मतलब हम सोच समझ कर नहीं बोलते , या यु कहे कि आप सोचने और समझने कि क्षमता खो देते है ,

और आप ऐसी बातें कहते हैं जो वास्तव में दूसरे व्यक्ति को चोट पहुँचाने के लिए नहीं होती हैं, बस आप गुस्से में कह देते है ; और कई बार हम चाहते भी है कि जो शब्द हमने बोले है। वो हम वापस ले सकें। तो अगली बार जब आप कुछ आहत करने वाली बात कहने जाएं तो इस बात का ध्यान रखें – एक बार शांत हो जाने के बाद क्या आप इसे कहने के लिए पछताएंगे ?

बाद में पछताने से अच्छा है , कि अपने आप को रोको। गलत मत बोलो

9. बात शुरू होने से पहले ही रोक दें।

बात को कई बार बढ़ने से पहले हो रोका जा सकता है , तो कहाँ तक संभव हो बात को बढ़ने ही ना दे , या शुरू होने से पहले ही रोक दे,
बात बढ़ जाने के बाद कुछ नहीं हो सकता , ना ही शब्द वापिस लिए जा सकते है। और ना ही जो रिश्ते ख़राब हो चुके है उनको सही किया जा सकता है।
ज्यादा अच्छा है कि , समझदारी से काम ले अपना आप न खोये , हर समय लड़ने के लिए तैयार न रहे , अगर कोई बात है , तो उसे वही ख़तम करने कि कोशिश करे , और अगर आप किन्ही दो लोगो कि बात बिगड़ते हुए देखते है ,

तो वह ही कोशिश करे कि बात बढ़ने से पहले ही ख़तम करा दे, कुछ लोगो को झगड़ा आते देखने में मजा आता है , या वो खुद ही दो लोगो को उकसाकर झगड़ने के लिए प्रेरित करते है।
ये बहुत गलत बात है , जो हम बोते है वही काटते है। अगर हम ऐसा करते है , तो कोई और हमारे लिए भी किसी को उकसा रहा होता है।

10. जब आप गलत हों तो स्वीकार करें।

गलती को स्वीकार करने से आप छोटे नहीं हो जाते है , बल्कि बड़े बन जाते है ,अपनी नजरो में भी ,और निश्चित रूप से दूसरे कि नजरो में भी।

आप कितने भी बड़े आदमी है, आपका समाज में कितना भी मान रुतबा है , आर आप ये मानते है कि गलती आपकी है , और उसे माने और उसके लिए क्षमा भी मांग ले।

कभी-कभी यह स्वीकार करना बहुत कठिन होता है कि आप कब गलत हैं आप अपने अंदर तो जानते ही है , ना ,
तो इसे स्वीकार करने का साहस करे और ऐसा करने से आप न केवल दूसरे व्यक्ति से सम्मान प्राप्त करेंगे बल्कि सच्चाई को स्वीकार करने के बाद आप अपने बारे में बेहतर महसूस करेंगे। अगर आप गलत है

तो इसके लिए बहस न करे सॉरी बोलें, क्षमा मांगे , और आगे बढे।

 

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